ऑकलैंड, 11 जुलाई (वेब वार्ता)। भारत-न्यूजीलैंड ने अपने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई दिशा देते हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को शीघ्र लागू करने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर लगभग 35,000 करोड़ रुपये (7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर) तक पहुंचाने का साझा लक्ष्य तय किया गया। इस पहल को दोनों देशों के आर्थिक सहयोग के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिससे व्यापार, निवेश और तकनीकी साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद है।
2030 तक व्यापार दोगुना करने का साझा लक्ष्य
बैठक में दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग को व्यापक बनाने और व्यापारिक बाधाओं को कम करने पर विशेष जोर दिया। दोनों देशों का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन से व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके साथ ही निवेश, औद्योगिक सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिलेगी, जिससे दोनों देशों के उद्योगों और कारोबारियों को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा।
भारतीय निर्यातकों को मिलेगा बड़ा लाभ
समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों पर 100 प्रतिशत निर्यात शुल्क समाप्त करेगा। इससे भारतीय कपड़ा, औषधि, चमड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद तथा विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की संभावना है। दूसरी ओर भारत भी न्यूजीलैंड के लगभग 95 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क में उल्लेखनीय कमी करेगा। हालांकि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को घरेलू हितों की रक्षा के लिए विशेष संरक्षण दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क में कमी से दोनों देशों के बीच वस्तुओं की आवाजाही तेज होगी और व्यापारिक लागत में कमी आएगी, जिससे आयातकों और निर्यातकों दोनों को लाभ मिलेगा।
सीमा शुल्क प्रक्रिया होगी अधिक सरल
व्यापार को अधिक सुगम और तेज बनाने के लिए दोनों देशों ने ‘प्राधिकृत आर्थिक ऑपरेटर–पारस्परिक मान्यता व्यवस्था’ को लागू करने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था के लागू होने से सीमा शुल्क संबंधी औपचारिकताएं सरल होंगी और माल की निकासी में लगने वाला समय कम होगा। इससे कारोबार करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनने की उम्मीद है।
तकनीकी सहयोग को मिलेगा नया विस्तार
भारत और न्यूजीलैंड ने बागवानी, पशुपालन तथा वानिकी जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी सहमति व्यक्त की है। दोनों देश इन क्षेत्रों में नवाचार, उत्पादकता और टिकाऊ विकास को प्रोत्साहित करने के लिए मिलकर कार्य करेंगे।
इसके अलावा स्वच्छ ऊर्जा और जैव ईंधन के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन के साथ समन्वय बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास के साझा लक्ष्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
पर्यटन और संपर्क को मिलेगा बढ़ावा
दोनों देशों ने पर्यटन और व्यापारिक यात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए सीधी उड़ान सेवाएं शुरू करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई। साथ ही नाविकों के प्रमाणपत्रों की पारस्परिक मान्यता पर भी निर्णय लिया गया है, जिससे समुद्री क्षेत्र में सहयोग और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निवेश, तकनीकी सहयोग, संपर्क, पर्यटन और सामरिक साझेदारी को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। इससे भारत और न्यूजीलैंड के बीच दीर्घकालिक आर्थिक संबंध और अधिक सुदृढ़ होने की संभावना है।


