नई दिल्ली, 10 जुलाई। भारत में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने राष्ट्रीय रूफटॉप सोलर कार्यक्रम के लिए वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है। इस पहल से देश के लाखों परिवारों तक सौर ऊर्जा पहुंचाने के साथ-साथ सोलर विनिर्माण, स्थापना और सेवा क्षेत्र में करीब 17 लाख नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।
यह वित्तीय सहयोग केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना को गति देगा, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के एक करोड़ परिवारों को अपने घरों की छत पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को मिलेगा नया बल
भारत ने वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही वर्ष 2035 तक बिजली उत्पादन में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य भी तय किया गया है।
हालांकि बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों के विकास में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन घरेलू स्तर पर रूफटॉप सोलर को अपनाने की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पीएम सूर्य घर योजना शुरू की है, ताकि अधिक से अधिक परिवार सौर ऊर्जा अपनाकर बिजली खर्च कम कर सकें और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिल सके।
विश्व बैंक देगा ऋण और अनुदान
विश्व बैंक की ओर से स्वीकृत वित्तीय पैकेज में कुल 89 करोड़ डॉलर की सहायता शामिल है। इसके तहत पुनर्निर्माण एवं विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय बैंक की ओर से 82 करोड़ डॉलर का ऋण, स्वच्छ प्रौद्योगिकी कोष से 6 करोड़ डॉलर का रियायती ऋण और रहने योग्य पृथ्वी कोष से 1 करोड़ डॉलर का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
इसके अतिरिक्त विश्व बैंक इस योजना के लिए 4.2 अरब डॉलर की निजी वित्तीय सहायता भी जुटाएगा। यह राशि वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे परिवारों के लिए बिना अधिक आर्थिक बोझ के अपने घरों पर सोलर पैनल लगाना आसान होगा।
रूफटॉप सोलर से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
विश्व बैंक के भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने कहा कि संस्था पिछले एक दशक से भारत के रूफटॉप सोलर कार्यक्रम का सहयोग कर रही है। इस अवधि में दो अरब डॉलर से अधिक की वित्तीय सहायता जुटाई गई, जिसके परिणामस्वरूप देश की स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता लगभग 500 मेगावाट से बढ़कर 27 गीगावाट से अधिक हो गई है।
उन्होंने कहा कि नई वित्तीय सहायता से घरेलू सौर ऊर्जा बाजार को नई गति मिलेगी और सोलर उपकरण निर्माण, स्थापना, रखरखाव तथा सेवा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
परिवारों को मिलेगा आसान ऋण, घटेगा बिजली बिल
कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इस योजना का उद्देश्य केवल सोलर पैनल लगवाना ही नहीं, बल्कि वित्तीय बाधाओं को भी दूर करना है। बिजली वितरण कंपनियों, बैंकों और सोलर उपकरण उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं की क्षमता को भी मजबूत किया जाएगा, ताकि लोगों को एकीकृत और बेहतर सेवाएं मिल सकें।
बिना गिरवी के उपलब्ध कराए जाने वाले ऋण से अधिक से अधिक परिवार अपने घरों पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित कर सकेंगे। इससे न केवल मासिक बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आएगी, बल्कि देश में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।


