गांधीनगर, 03 जुलाई। गुजरात सेमीकंडक्टर हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। राज्य में आईआईटी गांधीनगर परिसर में जल्द ही ‘समर्थ’ सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की जाएगी। इस केंद्र का उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर उद्योग, चिप निर्माण, अनुसंधान, कौशल विकास और आधुनिक तकनीकी कार्यबल तैयार करना है। केंद्र की स्थापना के लिए भारत सरकार, गुजरात सरकार और आईआईटी गांधीनगर की ओर से कुल 190 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
राज्य सरकार का मानना है कि यह केंद्र न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश को इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण सहयोग देगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और उद्योगों से जुड़े पेशेवरों को अत्याधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
सेमीकंडक्टर उद्योग को मिलेगा मजबूत आधार
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही हैं। इसी कड़ी में समर्थ केंद्र की स्थापना को एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य सेमीकंडक्टर अनुसंधान, उन्नत विनिर्माण तकनीकों का विकास और उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विद्यार्थी सीधे सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों में काम करने के लिए तैयार किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए केवल कारखाने स्थापित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशिक्षित तकनीकी विशेषज्ञों की उपलब्धता भी उतनी ही आवश्यक है। यह केंद्र उसी आवश्यकता को पूरा करेगा।
विद्यार्थियों और शिक्षकों को मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण
आईआईटी गांधीनगर द्वारा इस परियोजना के लिए आवश्यक संसाधनों की खरीद और भवन निर्माण संबंधी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। केंद्र शुरू होने के बाद इंजीनियरिंग के विद्यार्थी, शोधार्थी, प्राध्यापक तथा उद्योगों में कार्यरत विशेषज्ञ यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे।
केंद्र में विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे वे सीधे चिप निर्माण उद्योग में रोजगार के लिए तैयार हो सकें।
अनुसंधान और कौशल विकास पर रहेगा विशेष जोर
समर्थ केंद्र में अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को समान प्राथमिकता दी जाएगी। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की तकनीकी जानकारी प्राप्त हो सके।
राज्य के विभिन्न इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के साथ समझौते की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इस सुविधा का लाभ मिल सके।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि राज्य के विद्यार्थी मामूली शुल्क पर इस केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। इसके अलावा अल्पकालिक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम और विशेष ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।
पांच वर्षों में 10 हजार से अधिक लोगों को मिलेगा प्रशिक्षण
योजना के अनुसार आगामी पांच वर्षों में इस केंद्र के माध्यम से बड़ी संख्या में प्रशिक्षित तकनीकी कार्यबल तैयार किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर के लगभग 5600 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा व्यावसायिक और तकनीकी पाठ्यक्रमों के 1500 तकनीशियनों तथा 1000 प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों को भी आधुनिक प्रशिक्षण मिलेगा।
इतना ही नहीं, उद्योगों में कार्यरत 230 पेशेवरों और 230 शिक्षकों को भी कौशल उन्नयन कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण और एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से 2700 से अधिक विद्यार्थियों को सेमीकंडक्टर क्षेत्र की जानकारी दी जाएगी।
इस प्रकार कुल मिलाकर 10 हजार से अधिक लोगों को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
आधुनिक प्रयोगशालाओं से लैस होगा केंद्र
प्रस्तावित केंद्र में अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना की जाएगी, जहां विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को आधुनिक उपकरणों पर कार्य करने का अवसर मिलेगा।
यहां नैनो निर्माण तकनीक, सीएमओएस प्रक्रिया, चिप निर्माण परीक्षण, उपकरणों की गुणवत्ता जांच, डिवाइस मॉडलिंग तथा एकीकृत परिपथ डिजाइन से जुड़ी विशेष प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी।
इन सुविधाओं से विद्यार्थियों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण जैसा अनुभव मिलेगा और देश में उच्च गुणवत्ता वाले तकनीकी विशेषज्ञ तैयार किए जा सकेंगे।
भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत का लक्ष्य केवल सेमीकंडक्टर कारखाने स्थापित करना नहीं, बल्कि संपूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करना है। इसमें डिजाइन, विनिर्माण, मशीन निर्माण, सामग्री आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था सहित पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
इसी सोच के तहत इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन को आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि देश वैश्विक चिप निर्माण क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सके।
गुजरात बनेगा सेमीकंडक्टर क्षेत्र का प्रमुख केंद्र
विशेषज्ञों का मानना है कि गुजरात सेमीकंडक्टर हब के रूप में तेजी से उभर रहा है। राज्य में हो रहे निवेश, उद्योगों की बढ़ती भागीदारी, तकनीकी शिक्षा संस्थानों का सहयोग और सरकार की सक्रिय नीतियां इस दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रही हैं।
आईआईटी गांधीनगर में स्थापित होने वाला समर्थ सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण केंद्र न केवल कुशल मानव संसाधन तैयार करेगा, बल्कि अनुसंधान, नवाचार और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे भारत की चिप निर्माण क्षमता मजबूत होगी, स्थानीय उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे और देश को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय बढ़त हासिल होगी।


