नई दिल्ली, 03 जुलाई। कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में वर्ष 2025 से 2030 के दौरान आय में 17.3 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर रहने का अनुमान जताया गया है। ब्रिकवर्क रेटिंग्स रिपोर्ट के अनुसार घरेलू मांग में लगातार बढ़ोतरी, ऋण वितरण में सुधार, वस्तु एवं सेवा कर में राहत, छोटे शहरों से बढ़ती खपत और प्रीमियम उत्पादों की मांग इस वृद्धि के प्रमुख आधार बनेंगे। रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और विभिन्न क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन को भी रेखांकित किया गया है।
उपभोक्ता वस्तु उद्योग को मिलेंगे कई सकारात्मक कारक
रिपोर्ट के अनुसार कंज्यूमर गुड्स सेक्टर ग्रोथ को आने वाले वर्षों में कई आर्थिक कारकों का समर्थन मिलेगा। विशेष रूप से छोटे और मध्यम शहरों में उपभोक्ताओं की क्रय क्षमता बढ़ने, ऋण उपलब्धता में सुधार और बेहतर आर्थिक गतिविधियों के कारण उपभोक्ता वस्तुओं की मांग लगातार बढ़ने की संभावना है।
इसके साथ ही प्रीमियम श्रेणी के उत्पादों की ओर उपभोक्ताओं का बढ़ता रुझान भी इस क्षेत्र की आय में उल्लेखनीय वृद्धि का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली और बढ़ती आय के चलते उपभोक्ता उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए भी मजबूत संभावनाएं
रिपोर्ट में हेल्थकेयर सेक्टर को भी आने वाले वर्षों के लिए मजबूत स्थिति में बताया गया है। देश में चिकित्सा सेवाओं की बढ़ती मांग, लगभग 13 अरब डॉलर के चिकित्सा पर्यटन बाजार और आयुष्मान भारत योजना के दायरे में 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को शामिल किए जाने से इस क्षेत्र को अतिरिक्त गति मिलने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और बढ़ते निवेश के कारण स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी।
सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर पर भरोसा कायम
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के अनुसंधान प्रमुख राजीव शरण के अनुसार मजबूत विनिर्माण और सेवा गतिविधियों के चलते वित्त वर्ष 2026 में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं वित्त वर्ष 2027 में यह दर 6.7 प्रतिशत रहने की संभावना व्यक्त की गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आगामी वित्त वर्ष में महंगाई दर लगभग 4.6 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। हालांकि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और अल नीनो जैसे जलवायु संबंधी जोखिमों पर लगातार निगरानी रखने की आवश्यकता बताई गई है।
अधिकांश क्षेत्रों का ऋण परिदृश्य स्थिर रहने की उम्मीद
रिपोर्ट के अनुसार मूल्यांकन किए गए 25 क्षेत्रों में से 22 क्षेत्रों के लिए ऋण परिदृश्य स्थिर रहने का अनुमान है। इसका प्रमुख कारण मजबूत घरेलू मांग, सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय में निरंतर वृद्धि, कंपनियों की बेहतर वित्तीय स्थिति, लाभप्रदता में सुधार और अनुमानित नकदी प्रवाह को माना गया है।
विशेष रूप से प्रौद्योगिकी, वाहन, दूरसंचार, आधारभूत संरचना, परिवहन व्यवस्था, औद्योगिक उत्पादन और बिजली उत्पादन क्षेत्रों को ऋण में कमी, सरकारी नीतिगत सहयोग तथा नए व्यापार समझौतों के कारण निर्यात के बेहतर अवसर मिलने की संभावना जताई गई है।
कुछ क्षेत्रों पर बना रहेगा दबाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रसायन और वस्त्र उद्योग अभी भी लाभ मार्जिन पर दबाव का सामना कर सकते हैं। वहीं परिवहन और हवाईअड्डा क्षेत्र में ऋण का स्तर अपेक्षाकृत अधिक बना हुआ है। इसके बावजूद इन क्षेत्रों की ऋण क्षमता मजबूत भुगतान क्षमता, लाभप्रदता में सुधार और स्थिर आय की संभावनाओं के कारण संतुलित बनी रहने की उम्मीद है।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के मुख्य रेटिंग अधिकारी के. एच. पटनायक ने कहा कि समग्र रूप से भारत का व्यापक आर्थिक वातावरण मजबूत बना हुआ है। उनका मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत है, जो विभिन्न उद्योगों की ऋण गुणवत्ता और दीर्घकालिक विकास को सहारा प्रदान करेगी।


