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टीएमसी में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम, 20 सांसदों के अलग होने का दावा

नई दिल्ली, 15 जून (वेब वार्ता)। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 असंतुष्ट सांसदों ने पार्टी से अलग होकर त्रिपुरा स्थित एक छोटे राजनीतिक दल Nationalist Citizen Party of India में विलय का दावा किया है। इस घटनाक्रम को राष्ट्रीय राजनीति में एक असामान्य और महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

इन सांसदों के इस कदम को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पश्चिम बंगाल की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी से जुड़े जनप्रतिनिधियों ने अब एक अन्य राज्य आधारित दल के साथ नया राजनीतिक मंच अपनाने की बात कही है।

लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात और अलग समूह की मांग

बागी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान सांसदों ने लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता देने और बैठने की अनुमति के लिए एक औपचारिक पत्र सौंपा।

मुलाकात के बाद टीएमसी की सांसद काकोली घोष ने दावा किया कि पार्टी से निर्वाचित 20 सांसदों ने मिलकर अलग संसदीय समूह बनाने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि ये सांसद अब संगठित रूप से आगे बढ़ना चाहते हैं और अपनी राजनीतिक भूमिका पुनर्परिभाषित करना चाहते हैं।

दलबदल कानून और दो-तिहाई समर्थन का दावा

सांसदों की ओर से यह भी दावा किया गया कि यह समूह पार्टी के कुल सांसदों के दो-तिहाई से अधिक का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में उनका कहना है कि संसदीय नियमों के तहत उन्हें अलग गुट के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए।

यदि यह दावा स्वीकार किया जाता है, तो यह मामला दलबदल कानून के दायरे में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। इस घटनाक्रम पर अब राजनीतिक और कानूनी विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं।

एनडीए के साथ सहयोग की बात

काकोली घोष ने यह भी कहा कि सभी सांसद अब राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए आगे काम करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि यह समूह प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ सहयोग करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल

इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है। यदि लोकसभा अध्यक्ष इस समूह की मांग को स्वीकार करते हैं, तो यह तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।

साथ ही, यह बदलाव राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी और सत्तारूढ़ गठबंधनों के समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया और तेज होने की संभावना है।

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