ऑकलैंड, 11 जुलाई (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को न्यूजीलैंड के उद्योग जगत से भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत अब केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक विकास का लॉन्चपैड बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच संपन्न मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, सेवाओं और प्रतिभा के आदान-प्रदान के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
ऑकलैंड में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की मौजूदगी में दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन, विविधता और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता भारत और न्यूजीलैंड की साझेदारी को मजबूत आधार प्रदान करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यही साझा दृष्टिकोण भविष्य में आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
मुक्त व्यापार समझौता बना ऐतिहासिक उपलब्धि
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने केवल नौ महीने के रिकॉर्ड समय में मुक्त व्यापार समझौता संपन्न किया है, जो द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक सहयोग को नई गति देगा और निवेश, विनिर्माण, सेवाओं तथा नवाचार के क्षेत्र में व्यापक अवसर पैदा करेगा।
उन्होंने भरोसा जताया कि भारत और न्यूजीलैंड वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर सात अरब न्यूजीलैंड डॉलर, यानी लगभग 35 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने के साझा लक्ष्य को अवश्य हासिल करेंगे।
20 अरब डॉलर के निवेश से मजबूत होगी आर्थिक साझेदारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। उनके अनुसार यह केवल वित्तीय निवेश नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा में सहभागी बनने का विश्वास और संकल्प भी है। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी।
भारत निवेशकों के लिए अवसरों का केंद्र
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल परिवर्तन, आधुनिक आधारभूत ढांचा, कुशल युवा कार्यबल और निरंतर आर्थिक सुधार देश को वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक गंतव्यों में शामिल करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में नीति की स्थिरता, राजनीतिक स्थिरता और सुधारों की निरंतरता ने देश को वैश्विक आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बना दिया है। दुनिया के निवेशकों के लिए भारत दीर्घकालिक विकास और बेहतर प्रतिफल का भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।
‘भारत वैश्विक विकास का लॉन्चपैड’
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया के लिए भारत का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—भारत केवल एक बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक विकास का लॉन्चपैड है। उन्होंने न्यूजीलैंड की कंपनियों से भारत के तेजी से बढ़ते विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा बनने और दीर्घकालिक निवेश करने का आग्रह किया।
उन्होंने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र सहित 14 प्रमुख क्षेत्रों में लगभग 20 अरब डॉलर का प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे वैश्विक कंपनियों को भारत में उत्पादन और निर्यात बढ़ाने के व्यापक अवसर मिल रहे हैं।
विमानन, पर्यटन और संपर्क पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में हवाई अड्डों का तेजी से विस्तार हो रहा है और क्षेत्रीय हवाई संपर्क लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है।
उन्होंने दोनों देशों के बीच माल परिवहन गलियारा, सीधी उड़ान सेवाएं और संयुक्त पर्यटन पैकेज विकसित करने का सुझाव दिया, जिससे व्यापार और पर्यटन दोनों क्षेत्रों को नई गति मिल सके।
फिनटेक, अंतरिक्ष और नवाचार में सहयोग की अपार संभावनाएं
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत फिनटेक क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है और दुनिया के लगभग 50 प्रतिशत तात्कालिक डिजिटल भुगतान भारत में होते हैं। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के बाद देश में 400 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप कार्यरत हैं, जिनमें एक यूनिकॉर्न भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते में न्यूजीलैंड के माओरी समुदाय के व्यवसायों को भी विशेष महत्व दिया गया है। दोनों देश समावेशी और सतत व्यापार का ऐसा मॉडल विकसित कर सकते हैं, जो साझा मूल्यों और समान विकास की भावना पर आधारित हो।
प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के उद्योग जगत से एक महत्वाकांक्षी व्यापारिक रोडमैप तैयार करने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत और न्यूजीलैंड को अपनी-अपनी ताकतों का लाभ उठाकर कम से कम पांच प्रमुख संयुक्त परियोजनाओं की पहचान करनी चाहिए। साथ ही इन परियोजनाओं की समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी समीक्षा तंत्र विकसित करना आवश्यक होगा, जिससे द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी की पूरी क्षमता का लाभ उठाया जा सके।


