नई दिल्ली, 11 जुलाई (वेब वार्ता)। दुनिया में कैंसर का बढ़ता खतरा आने वाले दशकों में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की 8 जुलाई को जारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2050 तक दुनियाभर में कैंसर के नए मामलों की संख्या बढ़कर करीब 3.5 करोड़ प्रति वर्ष हो सकती है। यह मौजूदा आंकड़ों की तुलना में लगभग 67 प्रतिशत अधिक होगी।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कैंसर के बढ़ते मामलों का सबसे गंभीर असर निम्न और मध्यम आय वाले देशों पर पड़ेगा। इन देशों में कैंसर के मामलों में 133 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, समय पर जांच का अभाव और महंगे इलाज के कारण इन क्षेत्रों में चुनौती और बड़ी हो सकती है।
दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति को कैंसर का खतरा
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कभी न कभी कैंसर होने की आशंका है। कैंसर का प्रभाव केवल मरीज के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर परिवार, देखभाल करने वालों और समाज की आर्थिक व्यवस्था पर भी पड़ता है।
स्वास्थ्य संगठन ने अनुमान लगाया है कि किसी न किसी रूप में दुनिया की करीब 92 प्रतिशत आबादी कैंसर के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव से जुड़ सकती है। बीमारी के बढ़ते बोझ के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
2024 में सामने आए 2.06 करोड़ नए कैंसर मामले
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनिया में करीब 2.06 करोड़ नए कैंसर मामलों की पहचान हुई। इनमें अलग-अलग उम्र के मरीज शामिल हैं। कैंसर अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है, बल्कि बच्चों और युवाओं में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।
डब्ल्यूएचओ ने बताया कि हर साल करीब 4 लाख बच्चे और किशोर कैंसर से प्रभावित होते हैं। इनमें बड़ी संख्या उन देशों की होती है, जहां बीमारी की शुरुआती पहचान और आधुनिक इलाज की सुविधाएं सीमित हैं।
कैंसर बन रहा समय से पहले मौत का बड़ा कारण
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, कैंसर दुनिया में समय से पहले होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल हो चुका है। वर्ष 2024 में कैंसर से हुई मौतों में 48 लाख से अधिक लोग 30 से 69 वर्ष की आयु के थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई प्रकार के कैंसर का इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए समय पर जांच और बीमारी की शुरुआती पहचान बेहद जरूरी है। देरी से पता चलने पर इलाज अधिक कठिन और महंगा हो सकता है।
कैंसर के कारण लाखों बच्चों ने खोए माता-पिता
कैंसर का सामाजिक प्रभाव भी बेहद गंभीर है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में कैंसर से हुई मौतों के कारण दुनियाभर में करीब 24.5 लाख बच्चे अनाथ हो गए।
इनमें लगभग 10.4 लाख बच्चों ने अपनी मां को खोया, जबकि 14.1 लाख बच्चों ने अपने पिता को खो दिया। भारत, चीन, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, इथियोपिया और पाकिस्तान जैसे देशों में ऐसे मामलों की संख्या अधिक दर्ज की गई।
कैंसर मरीजों पर मानसिक दबाव भी बढ़ा
रिपोर्ट में बताया गया है कि कैंसर केवल शारीरिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। बड़ी संख्या में मरीज चिंता, तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं का सामना करते हैं।
मरीजों के परिवार और देखभाल करने वाले लोग भी लंबे समय तक मानसिक दबाव, सामाजिक अलगाव और आर्थिक परेशानियों से गुजरते हैं। इलाज का खर्च, आय में कमी और लगातार चिकित्सा जरूरतें कई परिवारों को आर्थिक संकट में पहुंचा देती हैं।
डब्ल्यूएचओ ने कैंसर को परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक बोझ बताते हुए कहा है कि कई मामलों में बीमारी लोगों को गंभीर वित्तीय संकट में धकेल सकती है।
गरीब देशों में जांच और इलाज की सुविधाएं सबसे बड़ी चुनौती
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की आधी से अधिक आबादी को अब भी पैथोलॉजी जांच और चिकित्सा इमेजिंग जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
कम आय वाले देशों में विशेषज्ञ डॉक्टरों, आधुनिक उपकरणों और उपचार केंद्रों की कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। रिपोर्ट में बताया गया है कि सब-सहारा अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी है।
इसके विपरीत, विकसित देशों में बेहतर स्वास्थ्य ढांचे के कारण मरीजों के बचने की संभावना अधिक रहती है।
इलाज की उपलब्धता में अमीर और गरीब देशों के बीच बड़ा अंतर
डब्ल्यूएचओ ने बताया कि उच्च आय वाले देशों और कम आय वाले देशों के बीच कैंसर उपचार के परिणामों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
स्तन कैंसर के मामलों में विकसित देशों में मरीजों के पांच वर्ष तक जीवित रहने की संभावना काफी अधिक होती है, जबकि कम आय वाले देशों में यह दर काफी कम रह जाती है। इसी तरह बच्चों में होने वाले रक्त कैंसर के इलाज में भी देशों के बीच बड़ा अंतर देखा गया है।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं वाले क्षेत्रों में अधिकतर बच्चे इलाज के बाद स्वस्थ हो जाते हैं, जबकि कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था वाले देशों में मृत्यु दर अधिक बनी रहती है।
कैंसर रोकथाम के लिए वैश्विक रणनीति की जरूरत
डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि कैंसर अब केवल चिकित्सा समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, आर्थिक सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा वैश्विक मुद्दा बन चुका है।
संगठन ने कैंसर की रोकथाम, नियमित जांच, समय पर इलाज और सभी देशों में स्वास्थ्य सुविधाओं की समान उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में कैंसर दुनिया के लिए सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बन सकता है।


