अंकारा, 09 जुलाई। तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने हाल ही में संपन्न नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के नेताओं को एक ऐसा उपहार दिया, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। एर्दोगन ने सम्मेलन में शामिल प्रत्येक नेता को उनके नाम से अंकित विशेष रिवॉल्वर और जीवित गोलियों का एक डिब्बा भेंट किया। इस असामान्य उपहार ने जहां कई नेताओं को हैरान किया, वहीं कई देशों में हथियार संबंधी कानूनों के कारण यह कानूनी और सुरक्षा का विषय भी बन गया।
हर नेता के नाम से अंकित था विशेष उपहार
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सम्मेलन में शामिल सभी राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों को लकड़ी के विशेष डिब्बे में सजा हुआ तुर्किये में निर्मित रिवॉल्वर भेंट किया गया। प्रत्येक हथियार पर संबंधित नेता का नाम अंकित था और उसके साथ जीवित गोलियों का डिब्बा भी दिया गया। बताया जा रहा है कि इस पहल का उद्देश्य तुर्किये के रक्षा उद्योग और हथियार निर्माण क्षमता को प्रदर्शित करना था।
ब्रिटेन और कनाडा के सामने खड़ी हुई कानूनी चुनौती
इस उपहार के बाद सबसे अधिक चर्चा ब्रिटेन और कनाडा के प्रधानमंत्रियों को लेकर हुई। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने बताया कि वह पिस्तौल अपने देश नहीं ले जा सके, क्योंकि ब्रिटेन के हथियार संबंधी कानून इसके आयात की अनुमति नहीं देते। तुर्किये की ओर से निर्यात संबंधी अनुमति दिए जाने के बावजूद ब्रिटिश कानूनों के कारण हथियार को वहीं छोड़ना पड़ा।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को भी इसी प्रकार की स्थिति का सामना करना पड़ा। कनाडा के नियमों के अनुरूप उन्होंने पिस्तौल को संबंधित सुरक्षा एजेंसी के सुपुर्द कर दिया, ताकि किसी भी प्रकार के कानूनी उल्लंघन से बचा जा सके।
सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं आगे की प्रक्रिया पर विचार
विभिन्न देशों की सुरक्षा एजेंसियां अब इन हथियारों के भविष्य को लेकर अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रही हैं। कुछ देशों में इन्हें निष्क्रिय कर सरकारी अभिलेखागार या संग्रहालय में रखने की संभावना जताई गई है, जबकि कुछ देशों ने इन्हें सुरक्षित सरकारी संरक्षण में रखने का निर्णय लिया है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन द्वारा अपने उपहार को सैन्य संग्रहालय को दान किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। वहीं कुछ अन्य देशों ने संबंधित दूतावासों के माध्यम से आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने की प्रक्रिया शुरू की है।
कूटनीतिक उपहार पर छिड़ी अंतरराष्ट्रीय बहस
अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक बैठकों में आमतौर पर सांस्कृतिक, कलात्मक या स्मृति चिह्न स्वरूप उपहार दिए जाते हैं। ऐसे में किसी राष्ट्राध्यक्ष द्वारा व्यक्तिगत नाम वाली रिवॉल्वर और जीवित गोलियां भेंट किए जाने की घटना ने व्यापक बहस को जन्म दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम तुर्किये के रक्षा उद्योग की क्षमताओं को प्रदर्शित करने का प्रयास हो सकता है, लेकिन विभिन्न देशों के हथियार कानूनों और सुरक्षा मानकों के कारण यह उपहार व्यावहारिक चुनौती भी बन गया। यही वजह है कि यह मामला नाटो शिखर सम्मेलन की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो गया है।


