हरिद्वार, 04 जुलाई। मानसून के आगमन से पहले जहां संबंधित विभागों की तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं उत्तरी हरिद्वार के वार्ड संख्या 4 में जनप्रतिनिधि की सक्रियता सामने आई है। यहां कांग्रेस पार्षद महावीर वशिष्ठ ने जनहित को प्राथमिकता देते हुए अपनी निजी पहल और खर्च से सुखी नदी में सुरक्षा जालों की मरम्मत और नए जाल लगवाने का कार्य कराया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह कदम लंबे समय से लंबित समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
छह माह से क्षतिग्रस्त पड़े थे सुरक्षा जाल
जानकारी के अनुसार, सुखी नदी पर लगे सुरक्षा जाल पिछले लगभग छह माह से टूटे और क्षतिग्रस्त हालत में पड़े थे। जाल खराब होने के कारण नदी में कूड़ा-कचरा जमा हो रहा था, जिससे क्षेत्र में स्वच्छता और जल प्रवाह दोनों प्रभावित हो रहे थे।
मानसून के दौरान तेज बहाव की स्थिति में ये टूटे जाल बह जाने और स्थिति और अधिक खराब होने का खतरा भी बना हुआ था। इससे स्थानीय निवासियों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा था और जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई थी।
विभागीय उदासीनता के बाद पार्षद ने उठाया कदम
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस समस्या को लेकर पार्षद महावीर वशिष्ठ ने कई बार संबंधित विभागों के अधिकारियों को अवगत कराया था। इसके बावजूद लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
विभागीय स्तर पर समाधान न निकलने के बाद पार्षद ने स्वयं आगे बढ़कर अपने निजी संसाधनों से सुखी नदी में नए सुरक्षा जाल लगवाने का निर्णय लिया। इस पहल के तहत क्षतिग्रस्त जालों को हटाकर नए और मजबूत जाल लगाए गए, जिससे नदी में कचरा जमा होने की समस्या में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों ने की पहल की सराहना
पार्षद की इस पहल के बाद क्षेत्रवासियों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। स्थानीय लोगों ने कहा कि यह कार्य जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को दर्शाता है।
निवासियों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी वार्ड स्तर पर इसी तरह की तत्परता दिखाई जाएगी, जिससे क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं का समय पर समाधान हो सके।
जनहित और स्वच्छता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
यह पहल न केवल सुखी नदी की स्वच्छता व्यवस्था को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि मानसून से पहले संभावित समस्याओं को रोकने का भी एक प्रयास है।
हरिद्वार में लगातार बढ़ती जनसंख्या और शहरी दबाव के बीच ऐसी स्थानीय पहलें नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल भी उठाया है कि यदि समय पर विभागीय कार्रवाई होती तो इस समस्या को पहले ही हल किया जा सकता था।


