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सिलक्यारा टनल से निकल रहे पानी पर बढ़ी चिंता, जांच की मांग; पेयजल स्रोतों और यमुना पर प्रभाव की आशंका

बड़कोट नगर पालिका ने मामले को गंभीर बताया, निर्माण एजेंसी और एनएचआईडीसीएल को भेजा जाएगा पत्र

बड़कोट, 23 जून।

बड़कोट नगर पालिका ने मामले को गंभीर बताया, निर्माण एजेंसी और एनएचआईडीसीएल को भेजा जाएगा पत्र

निर्माणाधीन सिलक्यारा टनल से लगातार निकल रहे पानी को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। लोगों ने आशंका जताई है कि टनल निर्माण में उपयोग किए गए रसायनों और अन्य निर्माण सामग्री के अवशेष इस पानी के साथ बाहर आ रहे हैं, जिससे यमुना नदी और स्थानीय पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

यमुना नदी और पेयजल स्रोतों पर असर की आशंका

नगर पालिकाध्यक्ष विनोद डोभाल ने कहा कि टनल से निकलने वाला पानी खड्ड के माध्यम से यमुना नदी तक पहुंच रहा है। साथ ही यह क्षेत्र बड़कोट नगर की नलकूप आधारित पेयजल योजना के आसपास भी स्थित है। ऐसे में जल स्रोतों पर संभावित प्रभाव को लेकर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित निर्माण एजेंसी और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) को पत्र भेजकर जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की जाएगी।

टनल से लगातार बाहर निकाला जा रहा पानी

स्थानीय लोगों के अनुसार, पोल गांव छोर से निर्माणाधीन सिलक्यारा टनल के भीतर बड़ी मात्रा में पानी जमा हो रहा है। निर्माण एजेंसी ने इस पानी को बाहर निकालने के लिए पंप लगाए हैं, जिनकी मदद से पानी को नजदीकी खड्ड में छोड़ा जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह पानी आगे चलकर यमुना नदी में मिल रहा है, जिससे नदी के जल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।

वैज्ञानिक जांच की मांग

स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की स्वतंत्र और वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पानी के नमूनों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उसमें किसी प्रकार के रासायनिक या अन्य हानिकारक तत्व मौजूद हैं या नहीं।

लोगों ने यह भी मांग की है कि यमुना नदी और बड़कोट की पेयजल आपूर्ति से जुड़े नलकूपों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञों की निगरानी में अध्ययन कराया जाए।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा

स्थानीय लोगों का कहना है कि जल स्रोतों की सुरक्षा सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। ऐसे में संबंधित एजेंसियों को जल्द जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि लोगों की आशंकाओं का समाधान हो सके और पर्यावरणीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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