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भारत-वियतनाम नौसैनिक सहयोग मजबूत: आईएनएस उदयगिरि और कवरत्ती पहुंचे न्हा रोंग बंदरगाह

नई दिल्ली, 23 जून।

भारतीय नौसेना के तीन जहाजों की वियतनाम यात्रा, समुद्री साझेदारी और हिंद-प्रशांत सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

भारतीय नौसेना ने अपनी परिचालन तैनाती के तहत देश में डिजाइन और निर्मित तीन युद्धपोतों को वियतनाम भेजा है। इनमें से दो प्रमुख जहाज—स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस उदयगिरि और एंटी-सबमरीन वारफेयर कॉर्वेट आईएनएस कवरत्ती—हो ची मिन्ह सिटी के न्हा रोंग बंदरगाह पर पहुंच गए हैं, जहां उनका भव्य और गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

वियतनाम पीपुल्स नेवी, पीपुल्स कमेटी के प्रतिनिधियों और बंदरगाह अधिकारियों ने भारतीय युद्धपोतों का स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच मजबूत होते समुद्री संबंधों और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है।

ईस्टर्न फ्लीट की कमान में हुआ मिशन

यह तैनाती ईस्टर्न फ्लीट के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल आलोक आनंद के नेतृत्व में की जा रही है। दोनों जहाज 22 जून को वियतनाम पहुंचे और यहां कई स्तरों पर पेशेवर और परिचालन गतिविधियों में भाग लेंगे।

इन गतिविधियों में परिचालन योजना चर्चाएं, ऑन-बोर्ड ब्रीफिंग और संयुक्त अभ्यास से जुड़े संवाद शामिल हैं, जिनका उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और आपसी समझ को मजबूत करना है।

रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर फोकस

इस यात्रा के दौरान भारतीय और वियतनामी नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और रक्षा सहयोग के विस्तार जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श होगा।

दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच उच्चस्तरीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं, जिनमें रणनीतिक दृष्टिकोण साझा किए जाएंगे और भविष्य के सहयोग की रूपरेखा पर चर्चा होगी।

सांस्कृतिक और सामुदायिक कार्यक्रम भी होंगे शामिल

इस दौरे के दौरान केवल सैन्य गतिविधियां ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामुदायिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इनमें मैत्रीपूर्ण खेल आयोजन, जहाजों के निर्देशित दौरे और जन-संपर्क कार्यक्रम शामिल हैं, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और मित्रता को बढ़ाना है।

रणनीतिक साझेदारी में नया मील का पत्थर

नौसेना के कैप्टन विवेक मधवाल के अनुसार, यह तैनाती मई में भारत और वियतनाम के संबंधों को ‘उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा मिलने के बाद वियतनाम में भारतीय नौसेना की पहली बड़ी उपस्थिति है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित और समावेशी समुद्री व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

समुद्री सहयोग को नई दिशा

भारतीय नौसेना की यह पहल न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और स्थिरता को भी बढ़ावा देगी। दोनों देशों की नौसेनाएं इस सहयोग के माध्यम से साझा रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने और समुद्री चुनौतियों का संयुक्त रूप से समाधान करने की दिशा में काम करेंगी।

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