नई दिल्ली, 22 जून।
पिछले 12 वर्षों में डिजिटल अर्थव्यवस्था का तेजी से विस्तार, इंटरनेट यूजर्स 100 करोड़ के पार
भारत ने पिछले 12 वर्षों में डिजिटल क्षेत्र में ऐतिहासिक और अभूतपूर्व परिवर्तन दर्ज किया है। कभी केवल एक बड़े डिजिटल उपभोक्ता बाजार के रूप में पहचाना जाने वाला देश अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, सुपरकंप्यूटिंग और डेटा सेंटर जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है।
सरकारी स्तर पर जारी एक आधिकारिक फैक्ट शीट में कहा गया है कि डिजिटल इंडिया अभियान, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के विस्तार और तकनीकी नवाचारों ने भारत को दुनिया की प्रमुख डिजिटल शक्तियों में शामिल कर दिया है।
डिजिटल इंडिया से मिली नई गति, इंटरनेट क्रांति ने बदला भारत
फैक्ट शीट के अनुसार वर्ष 2015 में शुरू किए गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने देश में डिजिटल क्रांति की नींव रखी। इसके तहत ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ और हाई-स्पीड इंटरनेट ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचा।
- 2019 में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क: 19.35 लाख रूट किलोमीटर
- 2025 तक वृद्धि: 42.36 लाख रूट किलोमीटर
इंटरनेट उपयोग में भी जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है।
- 2014 में इंटरनेट कनेक्शन: 25.15 करोड़
- 2026 में बढ़कर: 102.86 करोड़
ब्रॉडबैंड कनेक्शन भी इसी अवधि में 6.1 करोड़ से बढ़कर दिसंबर 2025 तक लगभग 99.56 करोड़ तक पहुंच गए हैं।
5G विस्तार और सस्ता डेटा बना डिजिटल क्रांति का आधार
भारत ने 5G नेटवर्क विस्तार में दुनिया में सबसे तेज प्रगति करने वाले देशों में अपनी पहचान बनाई है। सरकार के अनुसार 5G सेवाएं देश के लगभग 99.9 प्रतिशत जिलों तक पहुंच चुकी हैं।
डिजिटल विस्तार का एक प्रमुख कारण डेटा की कम लागत भी रही है:
- 2014 में 1GB डेटा की कीमत: ₹269
- वर्तमान में: ₹8–₹10 प्रति GB
इसके साथ ही प्रति व्यक्ति मासिक डेटा खपत 61.66 MB से बढ़कर 24.01 GB तक पहुंच गई है।
सस्ते और सुलभ इंटरनेट ने डिजिटल शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ई-कॉमर्स, डिजिटल बैंकिंग और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत किया है।
AI, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक में भारत की बड़ी छलांग
सरकारी फैक्ट शीट के अनुसार भारत अब मिशन मोड में कई उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में कार्य कर रहा है, जिनमें शामिल हैं:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- सेमीकंडक्टर निर्माण
- क्वांटम कंप्यूटिंग
- साइबर सुरक्षा
- क्लाउड टेक्नोलॉजी
इन क्षेत्रों में निवेश, अनुसंधान और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे भारत तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन से मजबूत हुई तकनीकी क्षमता
भारत ने राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत 4,500 करोड़ रुपये के निवेश से बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।
- 38 सुपरकंप्यूटर देशभर में स्थापित
- संयुक्त क्षमता: 47 पेटाफ्लॉप्स
- स्वदेशी ‘परम रुद्र’ सुपरकंप्यूटर श्रृंखला विकसित
यह उपलब्धि उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करती है।
सेमीकंडक्टर मिशन से चिप निर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर कदम
दिसंबर 2021 में शुरू किए गए सेमीकंडक्टर इंडिया कार्यक्रम (₹76,000 करोड़) का उद्देश्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र बनाना है।
सरकार के अनुसार:
- 12 बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी (जून 2026 तक)
- कुल निवेश: ₹1.64 लाख करोड़
- इनमें 1 सेमीकंडक्टर फैब, 2 कंपाउंड यूनिट और 9 पैकेजिंग यूनिट शामिल
इसके अलावा भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा भी केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई है।
क्वांटम मिशन: भविष्य की तकनीक में भारत की मजबूत मौजूदगी
अप्रैल 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (₹6,003.65 करोड़) के तहत भारत क्वांटम कंप्यूटिंग और सुरक्षित संचार तकनीक में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्य उपलब्धियां:
- 4 राष्ट्रीय क्वांटम अनुसंधान केंद्र
- 150+ शोधकर्ता कार्यरत
- 1000 किलोमीटर लंबा सुरक्षित क्वांटम संचार नेटवर्क प्रदर्शित
- पहली ‘क्वांटम वैली’ की आधारशिला अमरावती में (फरवरी 2026)
यह परियोजना भारत को भविष्य की सुरक्षा और कंप्यूटिंग तकनीक में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
AI मिशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम में तेजी
सरकार ने 2024 में इंडिया AI मिशन (₹10,300 करोड़ से अधिक निवेश) शुरू किया, जिसका उद्देश्य AI अनुसंधान, स्टार्टअप्स और कंप्यूटिंग क्षमता को बढ़ाना है।
- भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप सक्रिय (मार्च 2026 तक)
- इनमें 89% स्टार्टअप AI तकनीक का उपयोग कर रहे हैं
- 38,000+ GPU क्षमता वाली साझा कंप्यूटिंग सुविधा विकसित
- AI कोश प्लेटफॉर्म पर 12,115 डेटासेट और 306 मॉडल उपलब्ध
डेटा सेंटर इंडस्ट्री में तेज विस्तार
भारत में डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है:
- 2020 में क्षमता: 375 मेगावाट
- 2025 तक अनुमानित क्षमता: 1,500 मेगावाट
मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहे हैं।
इसके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में बड़े हाइपरस्केल और AI-आधारित डेटा सेंटर विकसित किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष: डिजिटल महाशक्ति बनने की ओर भारत
सरकारी फैक्ट शीट के अनुसार, भारत अब केवल डिजिटल उपयोगकर्ता देश नहीं बल्कि तकनीकी नवाचार, AI, क्वांटम और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
डिजिटल इंडिया, मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम और बढ़ते तकनीकी निवेश ने भारत को दुनिया की प्रमुख डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर दिया है, और आने वाले वर्षों में इस गति के और तेज होने की उम्मीद है।


