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बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर बढ़ी चिंता, कई देशों में प्रतिबंध की मांग को मिला व्यापक समर्थन

जिनेवा, 20 जून। सोशल मीडिया की लत, बच्चों का ऑनलाइन उत्पीड़न, मानसिक स्वास्थ्य, आत्महत्या के बढ़ते खतरे, डब्ल्यूएचओ समर्थित अध्ययन और ऑस्ट्रेलिया, यूएई, ब्रिटेन सहित कई देशों में प्रस्तावित प्रतिबंध—इन मुद्दों ने वैश्विक स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। दुनिया भर में सरकारें और अभिभावक बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं। बढ़ती लत, साइबर बुलिंग और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभावों को देखते हुए कई देशों में कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ समर्थित अध्ययन में सामने आए चिंताजनक आंकड़े

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) समर्थित एक अध्ययन के अनुसार किशोरों में सोशल मीडिया की लत तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2018 में जहां यह आंकड़ा सात प्रतिशत था, वहीं 2022 तक बढ़कर 11 प्रतिशत हो गया। अध्ययन में पाया गया कि रोमानिया, आयरलैंड और माल्टा में 15 वर्षीय किशोरों में सोशल मीडिया की लत के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए। इसके विपरीत नीदरलैंड, डेनमार्क और एस्टोनिया में यह समस्या अपेक्षाकृत कम पाई गई।

लड़कियों पर अधिक पड़ रहा प्रभाव

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि लड़कों की तुलना में लड़कियों में सोशल मीडिया की लत अधिक है। रोमानिया में 28 प्रतिशत लड़कियों ने सोशल मीडिया पर अत्यधिक निर्भरता स्वीकार की, जबकि लड़कों में यह आंकड़ा 18 प्रतिशत रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि लड़कियों को सोशल मीडिया पर आकर्षक और परिपूर्ण दिखने के दबाव का अधिक सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही वे ऑनलाइन उत्पीड़न, ट्रोलिंग और नकारात्मक टिप्पणियों की भी अधिक शिकार बनती हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

प्रतिबंध के पक्ष में बढ़ रहा जन समर्थन

बच्चों की सुरक्षा को लेकर जनता का समर्थन लगातार बढ़ रहा है। हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार फ्रांस में 79 प्रतिशत, ब्रिटेन में 76 प्रतिशत, जर्मनी में 74 प्रतिशत और इटली में 70 प्रतिशत लोग 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पक्ष में हैं। खासकर माता-पिता इस तरह के कदमों का सबसे अधिक समर्थन कर रहे हैं।

यूरोप में तेजी से बन रहे नए कानून

जन समर्थन को देखते हुए कई यूरोपीय देश कानूनी कदम उठा रहे हैं। फ्रांस की नेशनल असेंबली ने 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध संबंधी कानून को मंजूरी दे दी है। वहीं स्पेन न्यूनतम आयु सीमा को बढ़ाकर 16 वर्ष करने का प्रस्ताव लेकर आया है। ग्रीस ने इस दिशा में सबसे सख्त रुख अपनाते हुए 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा की है, जिस पर जल्द संसद में मतदान होना है।

लागू करने में हैं कई चुनौतियां

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रतिबंधों को लागू करना आसान नहीं होगा। उम्र सत्यापन की प्रक्रिया, गोपनीयता संबंधी नियम और यूरोपीय संघ के तकनीकी कानून इसके सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इसके अलावा अभी तक पर्याप्त दीर्घकालिक शोध उपलब्ध नहीं हैं जो यह साबित कर सकें कि ऐसे प्रतिबंध बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण में कितनी प्रभावी सुधार ला सकते हैं। इसके बावजूद बढ़ती चिंताओं के बीच यह मुद्दा वैश्विक नीति निर्माण का महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।

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