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हरिद्वार सिडकुल में जीएसटी चोरी पर बड़ी कार्रवाई: चार कंपनियों पर छापेमारी, करोड़ों की कर हेराफेरी का खुलासा

हरिद्वार, 18 जून (वेब वार्ता)। औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल में राज्य कर विभाग ने जीएसटी चोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए चार कंपनियों पर एक साथ छापेमारी की है। बुधवार देर शाम तक चली इस व्यापक जांच में करोड़ों रुपये की कर चोरी, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और सर्कुलर ट्रेडिंग के गंभीर मामले सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच के दौरान विभाग ने मौके पर ही लगभग दो करोड़ रुपये की वसूली की, जबकि कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी जब्त कर लिए गए हैं।

इस कार्रवाई के बाद सिडकुल क्षेत्र की अन्य औद्योगिक इकाइयों में हड़कंप मच गया है। राज्य कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी कई अन्य कंपनियां भी जांच के दायरे में हैं और आने वाले दिनों में उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

प्लास्टिक दाना कारोबार से जुड़ी थीं कंपनियां

जानकारी के अनुसार, जिन चार कंपनियों पर छापेमारी की गई है, वे प्लास्टिक दाना (ग्रेन्यूल्स) के उत्पादन और ट्रेडिंग से जुड़ी हुई हैं। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा, सचल दल और ऑडिट इकाई के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से बुधवार को इन प्रतिष्ठानों में सर्वे और गहन जांच अभियान चलाया।

जांच के दौरान कंपनियों के स्टॉक, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, जीएसटी रिटर्न और डिजिटल डेटा का विस्तृत मिलान किया गया। इसमें भारी अनियमितताएं सामने आईं, जिनसे स्पष्ट हुआ कि कंपनियां कर प्रणाली का दुरुपयोग कर सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान पहुंचा रही थीं।

चार टीमों की संयुक्त छापेमारी

राज्य कर विभाग के उपायुक्त कार्तिकेय वर्मा ने बताया कि इस कार्रवाई के लिए चार विशेष जांच टीमों का गठन किया गया था, जिनमें कुल 12 अधिकारी शामिल थे। सभी टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर कंपनियों के दस्तावेज, गोदाम और उत्पादन इकाइयों की जांच की।

उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया कि ये कंपनियां आपस में सर्कुलर ट्रेडिंग में शामिल थीं। कागजों पर फर्जी तरीके से खरीद-बिक्री दिखाकर कारोबार का टर्नओवर बढ़ाया जा रहा था। इसके आधार पर कंपनियां फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ ले रही थीं, जिससे उन्हें वास्तविक कर भुगतान से बचने में मदद मिल रही थी।

स्टॉक और रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां

अधिकारियों ने जब कंपनियों के गोदामों में मौजूद भौतिक स्टॉक का मिलान खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और जीएसटी रिटर्न से किया, तो बड़े पैमाने पर अंतर सामने आया। कई मामलों में स्टॉक और दस्तावेजों के बीच भारी विसंगतियां पाई गईं।

जांच में यह भी सामने आया कि कंपनियों द्वारा कर भुगतान को बेहद कम या शून्य दिखाया जा रहा था, जबकि वास्तविक कारोबार काफी अधिक था। इन अनियमितताओं के आधार पर विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मौके पर ही लगभग दो करोड़ रुपये की वसूली की।

डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त

राज्य कर विभाग ने कार्रवाई के दौरान जीएसटी से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर सिस्टम, हार्ड डिस्क और डिजिटल रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन दस्तावेजों और डेटा की गहन जांच के बाद वास्तविक कर देनदारी और संभावित जुर्माने की राशि का आकलन किया जाएगा।

विभाग ने संकेत दिया है कि जांच पूरी होने के बाद अतिरिक्त वसूली और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

कर चोरी के खिलाफ सख्त अभियान जारी रहेगा

राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में कर अपवंचन और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के मामलों के खिलाफ विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को राजस्व नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि विभाग डिजिटल डेटा विश्लेषण और खुफिया इनपुट के आधार पर लगातार निगरानी कर रहा है, ताकि ऐसे मामलों का समय रहते पता लगाया जा सके। आने वाले समय में प्रदेश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसी तरह की छापेमारी और जांच अभियान चलाए जाएंगे।

सिडकुल में कारोबारी जगत में दहशत

इस बड़ी कार्रवाई के बाद सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में कई इकाइयों में चिंता का माहौल है। कारोबारी वर्ग में यह चर्चा तेज हो गई है कि विभाग अब तकनीकी निगरानी और डेटा विश्लेषण के माध्यम से कर चोरी करने वाली कंपनियों की पहचान कर रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई एक संकेत है कि जीएसटी अनुपालन में लापरवाही या गड़बड़ी करने वाली कंपनियों पर आने वाले दिनों में और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

Image source: pexels

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