नई दिल्ली, 16 जून (वेब वार्ता)। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल होने जा रही है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर 23 और 24 जून को दो दिवसीय भारत दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित ‘फ्रेमवर्क डील’ को अंतिम रूप देना और दोनों देशों के बीच एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की संभावनाओं को आगे बढ़ाना है।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक व्यापार परिदृश्य में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है और दोनों देश आपसी व्यापारिक साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। भारत और अमेरिका दोनों ही इस समझौते को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मान रहे हैं, क्योंकि इससे न केवल द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा बल्कि निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर भी खुलेंगे।
टैरिफ व्यवस्था में बदलाव से बढ़ी जटिलताएं
हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लागू हुए 10 प्रतिशत आयात शुल्क ने व्यापार समझौते की रूपरेखा को प्रभावित किया है। इस नए टैरिफ ढांचे के कारण दोनों देशों को अब अपनी शर्तों और प्रस्तावों पर पुनर्विचार करना होगा। भारत का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसके निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ बना रहे और किसी प्रकार की अतिरिक्त बाधाएं उत्पन्न न हों।
वर्तमान टैरिफ व्यवस्था 24 जुलाई तक लागू है, जिसके बाद इसमें बदलाव की संभावना है। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि दोनों देश समयसीमा से पहले किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचें, ताकि प्रस्तावित समझौते के पहले चरण को प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।
‘धारा 301’ जांच बनी अहम मुद्दा
वार्ता के दौरान अमेरिका द्वारा शुरू की गई ‘धारा 301’ जांच भी एक महत्वपूर्ण एजेंडा होगी। इस प्रावधान के तहत अमेरिका भारत पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने पर विचार कर सकता है। भारत इस मुद्दे पर अपनी मजबूत स्थिति रखते हुए इस तरह की दबावकारी व्यापारिक रणनीतियों का विरोध करेगा और संतुलित समाधान की मांग करेगा।
भारत का तर्क है कि ऐसे कदम वैश्विक व्यापार नियमों की भावना के अनुरूप नहीं हैं और इससे आपसी विश्वास प्रभावित हो सकता है।
व्यापारिक साझेदारी और भविष्य की संभावनाएं
आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि द्विपक्षीय आर्थिक संबंध मजबूत हो रहे हैं।
23-24 जून की यह बैठक न केवल मौजूदा व्यापारिक मतभेदों को सुलझाने में सहायक होगी, बल्कि भविष्य में व्यापार अधिशेष को संतुलित करने, निवेश बढ़ाने और नए क्षेत्रों में सहयोग के अवसर भी प्रदान करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो यह भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
इस बैठक पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत की भी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसके परिणाम वैश्विक व्यापार नीतियों और सप्लाई चेन पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।
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