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गरीबी से वैश्विक स्टील साम्राज्य तक का सफर: 76 वर्ष के हुए लक्ष्मी मित्तल

चुरू (राजस्थान), 15 जून (वेब वार्ता)। विश्व के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल और ‘स्टील किंग’ के नाम से प्रसिद्ध लक्ष्मी मित्तल आज अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। राजस्थान के चुरू जिले में जन्मे मित्तल की सफलता की कहानी संघर्ष, मेहनत और दूरदर्शिता का अनूठा उदाहरण मानी जाती है। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच शुरू हुआ उनका जीवन आज वैश्विक कारोबारी जगत की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में गिना जाता है।

लक्ष्मी मित्तल का बचपन कठिन परिस्थितियों में बीता। परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता था और कई बार रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो जाता था। उनके पिता मोहनलाल मित्तल ने संघर्ष करते हुए कोलकाता में एक छोटे व्यवसाय की शुरुआत की, जिसने आगे चलकर परिवार के औद्योगिक सफर की नींव रखी। इसी वातावरण में लक्ष्मी मित्तल ने व्यवसाय की बारीकियां सीखीं और अपने सपनों को आकार दिया।

आज वे दुनिया की अग्रणी स्टील कंपनियों में से एक, ArcelorMittal के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं। कंपनी में उनकी लगभग 38 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो उनकी व्यावसायिक सफलता और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है। स्टील उद्योग के अलावा उन्होंने खेल क्षेत्र में भी निवेश किया है। वे Rajasthan Royals में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं और फुटबॉल क्लब Queens Park Rangers से भी जुड़े हुए हैं।

लक्ष्मी मित्तल ने अपने करियर में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। वे फोर्ब्स की वैश्विक अमीरों की सूची में शीर्ष 10 में स्थान पाने वाले पहले भारतीयों में शामिल रहे हैं। उनके नेतृत्व में स्टील उद्योग ने नई ऊंचाइयों को छुआ और उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारतीय उद्यमिता की मजबूत पहचान बनाई।

अपार संपत्ति और अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल करने के बावजूद लक्ष्मी मित्तल अपनी जड़ों से जुड़े रहे हैं। वे अक्सर अपने संघर्षपूर्ण दिनों और पारिवारिक मूल्यों का उल्लेख करते हैं। उनके पिता भी कई अवसरों पर उन कठिन परिस्थितियों को याद कर चुके हैं, जिनसे निकलकर मित्तल ने विश्व व्यापार जगत में एक अलग पहचान बनाई। उनका जीवन आज भी लाखों युवाओं और उद्यमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

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