लखनऊ, 23 जून।
अलीगढ़ का कार्यक्रम छोड़ लखनऊ पहुंचे मुख्यमंत्री, एसआईटी गठित; मृतकों के परिजनों को 5 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये सहायता की घोषणा
लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने अलीगढ़ में अपना निर्धारित कार्यक्रम बीच में ही रद्द कर दिया और सीधे लखनऊ पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने घायलों से मुलाकात की और अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर जांच तथा कार्रवाई के निर्देश जारी किए।
घटनास्थल और ट्रामा सेंटर पहुंचे मुख्यमंत्री
हादसे के समय मुख्यमंत्री अलीगढ़ में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। मंच से ही घटना की सूचना मिलने पर उन्होंने कार्यक्रम स्थगित कर लखनऊ रवाना होने का निर्णय लिया। इससे पहले उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए थे।
लखनऊ पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सबसे पहले अलीगंज स्थित घटनास्थल पहुंचे, जहां उन्होंने आग लगने की घटना से संबंधित जानकारी ली और बचाव कार्यों की समीक्षा की। इसके बाद वह किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के ट्रामा सेंटर पहुंचे और घायलों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों को घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।

मृतकों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान
मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
सात दिन में रिपोर्ट देगी एसआईटी
मामले की गहन जांच के लिए मुख्यमंत्री आवास, 5 कालीदास मार्ग पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्णय लिया गया। अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी प्रवीण कुमार के नेतृत्व में गठित यह एसआईटी सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
सरकार ने एसआईटी को हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर हुई संभावित लापरवाही की भी जांच करने के निर्देश दिए हैं।

चार आरोपी गिरफ्तार, चार अधिकारियों पर गिरी गाज
पुलिस ने मामले में रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू को गिरफ्तार किया है। वहीं मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता गौरव कुमार, अग्निशमन विभाग के एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता अनिल कुमार तथा जूनियर इंजीनियर प्रमोद पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
बिल्डिंग के निर्माण और फायर सुरक्षा व्यवस्था की होगी जांच
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस भवन में आग लगी, उसका आवंटन वर्ष 1980 में विजय कुमार के नाम हुआ था। बाद में वर्ष 2013 में यह संपत्ति वीरेंद्र और सुरेंद्र शुक्ला के नाम दर्ज हुई। वर्ष 2016 में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भवन में अनधिकृत निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया।
करीब 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाली इस इमारत का नक्शा वर्ष 2014 में आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत हुआ था। एसआईटी अब ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त किए जाने, फायर एनओसी, एलडीए की भूमिका, बिजली विभाग की जिम्मेदारी तथा अन्य प्रशासनिक पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी। माना जा रहा है कि जांच का दायरा कई वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच सकता है।

15 लोगों की मौत, 9 घायल
गौरतलब है कि सोमवार को अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि नौ अन्य घायल हुए थे। मामले में थाना अलीगंज में छह नामजद समेत अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और अग्निशमन सेवा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस और प्रशासनिक एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हुई हैं।



