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डीआरसी में इबोला का प्रकोप गहराया, 896 पुष्ट मामले और 232 मौतें दर्ज

किंशासा, 19 जून। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी), इबोला वायरस, 896 पुष्ट मामले, 232 मौतें, इटुरी, नॉर्थ किवू और साउथ किवू में तेजी से फैलते संक्रमण ने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। डीआरसी के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, देश में इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 896 हो गई है, जबकि इस घातक बीमारी से अब तक 232 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि संक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी कदम जल्द नहीं उठाए गए तो इसका दायरा और अधिक बढ़ सकता है।

नए मामलों ने बढ़ाई चिंता

स्वास्थ्य मंत्रालय की दैनिक रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को पूर्वी प्रांतों इटुरी और नॉर्थ किवू में इबोला संक्रमण के 21 नए पुष्ट मामले सामने आए। इन नए मामलों में छह लोगों की मौत भी दर्ज की गई। अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण की रफ्तार अभी भी बनी हुई है और कई क्षेत्रों में सामुदायिक स्तर पर वायरस का प्रसार जारी है।

मंत्रालय के अनुसार, बंडिबुग्यो इबोला वायरस से फैला यह प्रकोप इटुरी, नॉर्थ किवू और साउथ किवू प्रांतों के 33 स्वास्थ्य क्षेत्रों को प्रभावित कर चुका है।

सैकड़ों मरीज उपचाराधीन

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में 383 मरीज आइसोलेशन केंद्रों या अस्पतालों में भर्ती हैं और उनका इलाज जारी है। वहीं, अब तक 78 मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।

इनमें 11 ऐसे मरीज भी शामिल हैं जिन्हें लगातार जांच में नकारात्मक परिणाम मिलने के बाद स्वस्थ घोषित किया गया। अधिकारियों का कहना है कि समय पर पहचान और उपचार से कई मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

हजारों संपर्कों की निगरानी

रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को 151 संदिग्ध मामले भी दर्ज किए गए, जिनमें 35 मौतें शामिल हैं। संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग बड़े पैमाने पर संपर्कों की निगरानी कर रहा है।

तीनों प्रभावित प्रांतों में कुल 6,367 लोगों को संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाला माना गया है। इनमें से 4,525 लोगों तक रिपोर्टिंग अवधि के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों की पहुंच बनी, जो 71.1 प्रतिशत की फॉलो-अप दर को दर्शाती है।

लगातार बढ़ रहे हैं मामले

स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि पुष्ट मामलों की संख्या सप्ताह-दर-सप्ताह बढ़ रही है। यह संकेत देता है कि समुदायों के भीतर वायरस का प्रसार अभी भी जारी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को तेजी से लागू नहीं किया गया तो संक्रमण नए क्षेत्रों तक फैल सकता है और स्थिति और गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों ने निगरानी, परीक्षण और आइसोलेशन की प्रक्रिया को और मजबूत करने पर जोर दिया है।

डीआरसी में इबोला का 17वां प्रकोप

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, डीआरसी में यह इबोला का 17वां आधिकारिक प्रकोप है। इसे 15 मई को आधिकारिक रूप से घोषित किया गया था। देश पहले भी कई बार इबोला महामारी का सामना कर चुका है, लेकिन वर्तमान प्रकोप तेजी से फैलने के कारण चिंता का विषय बना हुआ है।

क्या है इबोला और इसके लक्षण

इबोला रोग पहली बार वर्ष 1976 में सामने आया था। इसका नाम डीआरसी में स्थित इबोला नदी के नाम पर रखा गया, जिसके आसपास इस बीमारी का पहला बड़ा प्रकोप दर्ज किया गया था।

इबोला के शुरुआती लक्षण अचानक दिखाई देते हैं। इनमें तेज बुखार, अत्यधिक थकान, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द तथा गले में खराश शामिल हैं। बाद में मरीज को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और त्वचा पर चकत्ते जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में गुर्दे और यकृत की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी की शीघ्र पहचान, संक्रमित व्यक्तियों को अलग रखना और संपर्कों की निगरानी करना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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