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ट्रंप ने तीन अमेरिकी सैनिकों को दिया ‘मेडल ऑफ ऑनर’, बहादुरी और बलिदान को किया सलाम

वाशिंगटन, 19 जून। डोनाल्ड ट्रंप, मेडल ऑफ ऑनर, जेम्स कैपर्स जूनियर, निकोलस डॉकरी, जॉन डब्ल्यू. रिप्ले, वियतनाम युद्ध और अफगानिस्तान युद्ध से जुड़ी असाधारण वीरता को सम्मानित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन सैनिकों को अमेरिका का सर्वोच्च सैन्य सम्मान ‘मेडल ऑफ ऑनर’ प्रदान किया। इनमें रिटायर्ड मरीन मेजर जेम्स कैपर्स जूनियर, रिटायर्ड आर्मी मेजर निकोलस डॉकरी और मरणोपरांत मरीन कर्नल जॉन डब्ल्यू. रिप्ले शामिल हैं। व्हाइट हाउस में आयोजित विशेष समारोह में ट्रंप ने तीनों सैनिकों की वीरता, नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें अमेरिकी सैन्य इतिहास के महान नायकों में शामिल बताया।

व्हाइट हाउस में हुआ सम्मान समारोह

सम्मान समारोह के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में सेवा करना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के 250 वर्षों के इतिहास में अनगिनत सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है, लेकिन बहुत कम लोगों को ‘कांग्रेसनल मेडल ऑफ ऑनर’ जैसा प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुआ है।

ट्रंप ने कहा कि यह सम्मान केवल उन सैनिकों को दिया जाता है जिन्होंने असाधारण परिस्थितियों में अपने जीवन की परवाह किए बिना साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया हो। उन्होंने कहा कि इन सैनिकों की कहानियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।

वियतनाम युद्ध में जेम्स कैपर्स की अद्भुत बहादुरी

रिटायर्ड मरीन मेजर जेम्स कैपर्स जूनियर को वर्ष 1967 में वियतनाम युद्ध के दौरान किए गए साहसिक कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। व्हाइट हाउस के अनुसार, उस समय सेकंड लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात कैपर्स चार दिनों के एक अत्यंत जोखिमपूर्ण टोही मिशन का नेतृत्व कर रहे थे।

उनकी टीम का उद्देश्य उत्तरी वियतनामी सेना के एक महत्वपूर्ण रेजिमेंटल बेस कैंप का पता लगाना था। मिशन के दौरान उनकी टुकड़ी का कई बार दुश्मन की बड़ी सेना से सामना हुआ। एक हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैपर्स ने अपने साथियों का नेतृत्व जारी रखा।

उन्होंने न केवल सैनिकों का मनोबल बनाए रखा बल्कि समर्थन के लिए हवाई हमलों का समन्वय भी किया और घायल साथियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित की। ट्रंप ने कहा कि कैपर्स एक पैर से बुरी तरह घायल होने के बावजूद लड़ते रहे और लगभग एक घंटे तक क्लोज एयर सपोर्ट के लिए लगातार संपर्क बनाए रखा।

वर्षों बाद मिला सम्मान

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि जेम्स कैपर्स को 1967 में ही मेडल ऑफ ऑनर के लिए नामित किया गया था, लेकिन आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने से पहले उनके कमांडिंग अधिकारी का निधन हो गया। इसके कारण पुरस्कार प्रक्रिया अधूरी रह गई और उन्हें दशकों तक इस सम्मान का इंतजार करना पड़ा।

ट्रंप ने भावुक अंदाज में कहा कि देश ने उन्हें बहुत लंबा इंतजार करवाया है और अब आखिरकार उन्हें वह सम्मान मिल रहा है जिसके वे वास्तविक हकदार थे।

जॉन डब्ल्यू. रिप्ले की वीरता को मरणोपरांत सम्मान

मरीन कर्नल जॉन डब्ल्यू. रिप्ले को मरणोपरांत यह सम्मान प्रदान किया गया। उन्हें 2 अप्रैल 1972 को वियतनाम युद्ध के दौरान दिखाई गई असाधारण बहादुरी के लिए सम्मानित किया गया।

उस समय रिप्ले एक वरिष्ठ मरीन सलाहकार के रूप में कार्यरत थे। उत्तरी वियतनाम की सेना के बड़े हमले को रोकने के लिए उन्होंने भारी गोलीबारी के बीच बार-बार एक पुल के नीचे चढ़कर 500 पाउंड से अधिक विस्फोटक सामग्री लगाई।

लगातार पांच घंटे तक उन्होंने जान जोखिम में डालकर विस्फोटकों को सही स्थानों पर लगाया और उन्हें जोड़ने का कार्य किया। अंततः विस्फोट होने पर पुल ध्वस्त हो गया और दुश्मन की आगे बढ़ती सेना को रोक दिया गया। इस कार्रवाई ने युद्ध की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अफगानिस्तान में निकोलस डॉकरी का साहस

रिटायर्ड आर्मी मेजर निकोलस डॉकरी को अक्टूबर 2012 में अफगानिस्तान के कपिसा प्रांत में तालिबान के खिलाफ अभियान के दौरान दिखाई गई वीरता के लिए सम्मानित किया गया।

व्हाइट हाउस के अनुसार, जब उनकी यूनिट पर तालिबान लड़ाकों ने हमला किया, तब डॉकरी ने अपनी जान की परवाह किए बिना घायल सैनिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। उन्होंने जवाबी कार्रवाई का नेतृत्व किया और हवाई सहायता के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए।

ट्रंप ने कहा कि डॉकरी ने गोलाबारी और मोर्टार हमलों के बीच अपने घायल साथी को अपने शरीर से ढककर उसकी जान बचाने का प्रयास किया। उन्होंने युद्ध क्षेत्र में अंतिम सैनिक के रूप में मोर्चा छोड़ा और अपने साहस से साथियों के लिए मिसाल कायम की।

सैनिकों के प्रति राष्ट्र का आभार

समारोह के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका उन सभी सैनिकों का ऋणी है जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाली। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता और सुरक्षा ऐसे ही बहादुर सैनिकों के त्याग और समर्पण की वजह से संभव हो पाई है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जब 2026 में अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है, तब ऐसे नायकों को सम्मानित करना विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र इन सैनिकों के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।

क्या है ‘मेडल ऑफ ऑनर’

मेडल ऑफ ऑनर अमेरिका का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। यह सम्मान उन सैनिकों को दिया जाता है जिन्होंने ड्यूटी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर असाधारण वीरता, निडरता और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया हो।

यह पुरस्कार अमेरिकी सरकार की ओर से प्रदान किया जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित सैन्य अलंकरण माना जाता है। अमेरिकी इतिहास में अब तक सीमित संख्या में ही सैनिकों को यह सम्मान मिला है, क्योंकि इसके लिए असाधारण साहस और बलिदान का प्रदर्शन आवश्यक होता है।

250वीं वर्षगांठ से पहले विशेष महत्व

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सम्मान ऐसे समय में प्रदान किए गए हैं जब अमेरिका अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ की तैयारियों में जुटा है। ऐसे अवसर पर युद्ध नायकों की बहादुरी को याद करना न केवल सैन्य परंपराओं को सम्मान देना है, बल्कि नई पीढ़ी को सेवा, साहस और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों से प्रेरित करना भी है।

व्हाइट हाउस में आयोजित यह समारोह अमेरिकी सैन्य इतिहास के उन अध्यायों को याद करने का अवसर बना, जिनमें सैनिकों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना राष्ट्र की रक्षा के लिए असाधारण साहस का परिचय दिया था।

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