नई दिल्ली, 18 जून (वेब वार्ता)। फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बहुप्रतीक्षित मुलाकात हुई, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई थीं। लगभग 16 महीने के लंबे अंतराल के बाद हुई यह आमने-सामने की बैठक कूटनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों नेताओं की यह मुलाकात वैश्विक राजनीति और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से एक अहम पड़ाव के रूप में देखी जा रही है।
करीब 45 मिनट तक चली इस द्विपक्षीय वार्ता में दोनों नेताओं ने कई वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत और सकारात्मक चर्चा की। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी तनाव, अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट को व्यापार एवं ऊर्जा आपूर्ति के लिए खुला और सुरक्षित बनाए रखने की आवश्यकता पर दोनों पक्षों ने समान रूप से जोर दिया। दोनों नेताओं ने माना कि यह क्षेत्र वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर राष्ट्रपति ट्रंप से स्पष्ट रूप से कहा कि भारत और अमेरिका अपने साझा विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की सराहना की और आश्वासन दिया कि अमेरिका हर परिस्थिति में भारत के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी गंभीरता से उठाया। उन्होंने हाल ही में ओमान की खाड़ी में हुई उस दुखद घटना का उल्लेख किया, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार में लगे कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की सामूहिक जिम्मेदारी है और इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत और अमेरिका के बीच कई रणनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में प्रगति के संकेत मिले हैं। रक्षा सहयोग, हथियारों की खरीद, तकनीक हस्तांतरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहमति बनने की संभावना जताई जा रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत अमेरिका में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है और दोनों देश जल्द ही एक नए व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। फरवरी 2025 के बाद हुई यह बैठक दोनों देशों के संबंधों में आई हालिया दूरी को कम करने वाली मानी जा रही है और इसे एक नए कूटनीतिक अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
G7 शिखर सम्मेलन में भारत की उपस्थिति भी इस बार बेहद प्रभावशाली रही। यह भारत की इस मंच पर 13वीं भागीदारी थी, जबकि प्रधानमंत्री मोदी लगातार सातवीं बार इसमें शामिल हुए हैं। सम्मेलन की आधिकारिक तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी को मेजबान राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच में स्थान मिला, जिसे भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और प्रभाव का प्रतीक माना जा रहा है।
आर्थिक दृष्टि से भी यह मंच महत्वपूर्ण रहा, जहां दुनिया की कुल 126 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में G7 देशों की हिस्सेदारी लगभग 43 प्रतिशत यानी 55.32 ट्रिलियन डॉलर है। इनमें अमेरिका सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अग्रणी है, जिसकी जीडीपी 32 ट्रिलियन डॉलर से अधिक आंकी जाती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मंच से समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर बिना भय और बाधा के आवागमन सुनिश्चित करना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
इस मुलाकात को और भी महत्वपूर्ण बनाने वाला पहलू “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद की पहली आमने-सामने की बैठक होना रहा। इस दौरान दोनों नेताओं ने वैश्विक शांति और स्थिरता पर भी विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बात में “पश्चिम एशिया” और “शांति” जैसे विषयों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें एक शांत, संतुलित और प्रभावशाली नेता बताते हुए उनकी नेतृत्व क्षमता की सराहना की।
यह उच्चस्तरीय मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दुनिया कई क्षेत्रों में युद्ध, तनाव और अस्थिरता का सामना कर रही है। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच यह सकारात्मक संवाद वैश्विक शांति, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



