मुंबई, 08 जुलाई। हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री नीतू कपूर आज अपना 66वां जन्मदिन मना रही हैं। अपनी मासूम मुस्कान, सहज अभिनय और दमदार स्क्रीन उपस्थिति से करोड़ों दर्शकों का दिल जीतने वाली नीतू कपूर का फिल्मी सफर छह दशक से अधिक समय तक फैला हुआ है। बचपन में अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाली नीतू ने संघर्ष, सफलता, परिवार और वापसी के हर दौर को बेहद मजबूती से जिया है।
दिल्ली से मुंबई तक का संघर्षपूर्ण बचपन
नीतू कपूर का जन्म 08 जुलाई 1958 को दिल्ली के एक जाट सिख परिवार में हुआ था। उनका वास्तविक नाम हरनीत कौर था। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उनकी मां पूरे परिवार के साथ मुंबई आ गईं। आर्थिक और पारिवारिक चुनौतियों के बीच नीतू की अभिनय यात्रा की शुरुआत हुई।
बताया जाता है कि जब वह मात्र पांच वर्ष की थीं, तब प्रसिद्ध अभिनेत्री वैजयंतीमाला की नजर उनकी प्रतिभा पर पड़ी। उनके सुझाव पर निर्देशक टी. प्रकाश राव ने उन्हें वर्ष 1966 में प्रदर्शित फिल्म ‘सूरज’ में अवसर दिया। हालांकि इस फिल्म में अभिनय करने के बावजूद उन्हें पर्दे पर श्रेय नहीं मिला।
हरनीत कौर से बनीं ‘बेबी सोनिया’
फिल्मों में प्रवेश के साथ ही हरनीत कौर का नाम बदलकर बेबी सोनिया रखा गया। बाल कलाकार के रूप में उन्होंने कई फिल्मों में प्रभावशाली अभिनय किया। फिल्म ‘दस लाख’ के बाद उन्हें वास्तविक पहचान ‘दो कलियां’ से मिली।
इस फिल्म में उनके दोहरे किरदार और लोकप्रिय गीत ‘बच्चे मन के सच्चे’ ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद उन्होंने कई सफल फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।
मुख्य अभिनेत्री के रूप में मिली नई पहचान
किशोरावस्था में नीतू कपूर ने मुख्य अभिनेत्री के रूप में फिल्म ‘रिक्शावाला’ से अपने नए सफर की शुरुआत की। इस फिल्म में उनके साथ रणधीर कपूर मुख्य भूमिका में थे। हालांकि यह फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल नहीं रही, लेकिन नीतू के अभिनय की सराहना हुई।
इसके बाद वर्ष 1973 में प्रदर्शित ‘यादों की बारात’ ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी। इस फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने लगातार कई सफल फिल्मों में अभिनय किया और हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में अपनी जगह बना ली।
ऋषि कपूर संग शादी के बाद लिया फिल्मों से विराम
नीतू कपूर और ऋषि कपूर की जोड़ी पर्दे पर जितनी लोकप्रिय रही, वास्तविक जीवन में भी उतनी ही चर्चित रही। दोनों ने लगभग पांच वर्षों तक एक-दूसरे को जानने के बाद वर्ष 1980 में विवाह किया।
विवाह के बाद नीतू कपूर ने अपने सफल करियर के शिखर पर फिल्मों से दूरी बना ली। वर्ष 1983 में प्रदर्शित ‘गंगा मेरी मां’ उनके लंबे अंतराल से पहले की अंतिम फिल्म रही। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा समय परिवार और बच्चों रणबीर कपूर तथा रिद्धिमा कपूर की परवरिश को समर्पित किया।
25 वर्ष बाद शानदार वापसी
करीब 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद नीतू कपूर ने फिल्म ‘लव आज कल’ के माध्यम से बड़े पर्दे पर वापसी की। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। हाल के वर्षों में भी उन्होंने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया और यह साबित किया कि प्रतिभा समय की मोहताज नहीं होती।
आज नीतू कपूर हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिनकी अभिनय यात्रा नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत मानी जाती है।


