नई दिल्ली, 18 जून (वेब वार्ता)। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने गुरुवार को पश्चिमी नौसेना कमान का दौरा कर समुद्री सुरक्षा, परिचालन तैयारियों और रक्षा क्षमताओं की व्यापक समीक्षा की। सीडीएस पद संभालने के बाद उनका यह पहला पश्चिमी नौसेना कमान दौरा था, जिसे सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दौरे के दौरान जनरल सुब्रमणि ने पश्चिमी नौसेना कमान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की। इस दौरान वाइस एडमिरल संजय वत्सायन और अन्य उच्च अधिकारियों ने उन्हें कमान की मौजूदा परिचालन स्थिति, समुद्री सुरक्षा से जुड़े प्रमुख अभियानों, क्षमता विकास योजनाओं और भविष्य की रणनीतिक चुनौतियों की जानकारी दी। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य, आधुनिक सैन्य तकनीकों के उपयोग और समुद्री हितों की रक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों पर भी चर्चा हुई।
जनरल सुब्रमणि ने कमान के अंतर्गत आने वाली विभिन्न परिचालन इकाइयों और सैन्य संरचनाओं का निरीक्षण भी किया। उन्होंने अग्रिम मोर्चे पर तैनात बलों की तैयारियों का जायजा लिया और यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि भारतीय नौसेना किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम और सतर्क रहे। अधिकारियों ने उन्हें नौसेना की आधुनिक क्षमताओं, युद्धक संसाधनों और समुद्री निगरानी प्रणालियों की जानकारी भी दी।
सैन्य कर्मियों को संबोधित करते हुए सीडीएस ने उनके अनुशासन, समर्पण और पेशेवर दक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, समुद्री व्यापार मार्गों की रक्षा और राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में समुद्री सुरक्षा का महत्व और बढ़ गया है, ऐसे में नौसेना की तत्परता और दक्षता देश की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
जनरल सुब्रमणि ने सेनाओं के बीच संयुक्तता और समन्वय को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है। उन्होंने संयुक्त अभियानों, साझा संसाधनों और समन्वित रणनीतियों को राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताया।
उल्लेखनीय है कि जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने 31 मई को देश के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में पदभार संभाला था। कार्यभार ग्रहण करने के बाद से ही उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी तकनीकों के विकास, सैन्य आधुनिकीकरण और नवाचार को प्राथमिकता देने की बात कही है।
उन्होंने दोहराया कि भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी हथियार प्रणालियों और तकनीकों के विकास को बढ़ावा देना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने रक्षा उत्पादन, अनुसंधान और सैन्य आधुनिकीकरण में सभी हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, सीडीएस का यह दौरा भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता, संयुक्त सैन्य तैयारियों और समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



