हरिद्वार, 18 जून (वेब वार्ता)। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में जम्मू-कश्मीर प्रांत की बेटियों के उज्ज्वल भविष्य और स्वावलंबन को नई दिशा देने के उद्देश्य से तीन दिवसीय कन्या कौशल शिविर का शुभारंभ किया गया। इस शिविर में भाग लेने के लिए जम्मू-कश्मीर से बेटियों के साथ उनके अभिभावकों सहित 200 से अधिक लोगों का दल शांतिकुंज पहुंचा है।
शिविर का उद्घाटन गुरुवार को गायत्री विद्यापीठ की प्रबंधन समिति की प्रमुख शैफाली पंड्या ने दीप प्रज्वलन कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत के साथ ही वातावरण में आध्यात्मिक और प्रेरणादायक ऊर्जा का संचार देखने को मिला।
इस अवसर पर शैफाली पंड्या ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में बेटियों का सशक्त होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने व्यक्तित्व विकास, आंतरिक सौंदर्य, स्वास्थ्य संरक्षण और आत्मरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने आधुनिक दौर में सोशल मीडिया और मोबाइल के बढ़ते उपयोग को देखते हुए इसके सुरक्षित, संतुलित और सकारात्मक प्रयोग के बारे में भी बालिकाओं को जागरूक किया।
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने भी कार्यक्रम में प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बेटियों को आत्मनिर्माण के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के कल्याण के कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने युवाशक्ति को पूज्य गुरुसत्ता के संकल्पों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। डॉ. पंड्या ने यह भी कहा कि किसी भी समाज के नव निर्माण के लिए आत्मनिर्माण सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है।
शिविर के समन्वयक ने जानकारी देते हुए बताया कि तीन दिवसीय इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को कई महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। इनमें बेटियों का सशक्त होना, गायत्री एवं यज्ञ का व्यावहारिक ज्ञान-विज्ञान, जीवन लक्ष्य का निर्धारण, आदर्श एवं मित्र चयन में विवेक, सौंदर्य बोध बनाम फैशन, तथा आत्मरक्षा के व्यावहारिक गुर जैसे विषय शामिल हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी बेटियों में उत्साह और जिज्ञासा का विशेष माहौल देखा गया। आयोजकों का कहना है कि यह शिविर बालिकाओं के सर्वांगीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

