वर्सेल्स, 18 जून (वेब वार्ता)। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन का भव्य स्वागत किया है। यह समझौता वर्सेल्स में आयोजित एक उच्चस्तरीय रात्रिभोज के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया। मैक्रों ने इसे वैश्विक शांति और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने और ईंधन कीमतों में कमी की उम्मीद जताई जा रही है।
14-सूत्रीय समझौता और कूटनीतिक पहल
यह समझौता वाशिंगटन और तेहरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ माना जा रहा है। इस फ्रेमवर्क को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच बातचीत के बाद अंतिम रूप दिया गया।
समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच जारी सैन्य तनाव को समाप्त करना और अगले 60 दिनों के भीतर एक स्थायी शांति समझौते की दिशा में प्रक्रिया शुरू करना है। इसमें होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय स्थिरता स्थापित करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है।
होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर जोर
इस समझौते में विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट को फिर से सुरक्षित और खुला रखने पर जोर दिया गया है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग पर स्थिरता से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और तेल-गैस की कीमतों में गिरावट संभव है।
परमाणु नीति पर ईरान की प्रतिबद्धता
समझौते के तहत ईरान ने यह दोहराया है कि वह किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। साथ ही, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षण और निगरानी के साथ पूर्ण सहयोग देने की प्रतिबद्धता भी जताई है।
इसके बदले में अमेरिका ने चरणबद्ध तरीके से आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय परिसंपत्तियों को जारी करने पर सहमति व्यक्त की है।
आर्थिक पैकेज और क्षेत्रीय स्थिरता
समझौते में ईरान के लिए लगभग 300 अरब डॉलर के एक बड़े आर्थिक विकास कार्यक्रम का भी प्रस्ताव शामिल बताया गया है। इस योजना का उद्देश्य मध्य-पूर्व क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति देना और दीर्घकालिक स्थिरता स्थापित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता प्रभावी रूप से लागू होता है, तो यह न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों को नई दिशा देगा, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व में शांति और आर्थिक सहयोग के नए अवसर भी पैदा करेगा।



