नई दिल्ली, 02 जुलाई (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची के बीच गुरुवार को हुई शिखर वार्ता में भारत-जापान संबंधों को और मजबूत करने पर व्यापक सहमति बनी। दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग के विस्तार, सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला को अधिक सुरक्षित बनाने और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में साझेदारी को नई गति देने पर विशेष जोर दिया।
आर्थिक संबंधों के विस्तार पर केंद्रित रही वार्ता
शिखर वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने आर्थिक सुरक्षा, व्यापार और निवेश सहयोग को गहरा करने पर चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और जापान की साझेदारी विश्वास और साझा मूल्यों पर आधारित है, जो लगातार मजबूत हो रही है।
दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में आपूर्ति शृंखला को अधिक मजबूत और लचीला बनाना आवश्यक है, ताकि किसी भी बाहरी झटके का प्रभाव न्यूनतम किया जा सके।
सेमीकंडक्टर और तकनीकी सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
वार्ता में सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों पक्षों ने इस क्षेत्र में संयुक्त सहयोग को बढ़ाने और उत्पादन क्षमता व तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई।
इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत सामग्री और अन्य उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी चर्चा हुई। दोनों देशों का मानना है कि तकनीकी सहयोग आने वाले समय में आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनेगा।
आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला पर संयुक्त पहल
भारत और जापान ने आर्थिक सुरक्षा को लेकर एक साझा ढांचा विकसित करने पर भी सहमति व्यक्त की है। इसके तहत महत्वपूर्ण खनिजों, औषधि क्षेत्र और औद्योगिक आपूर्ति शृंखला को अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल वैश्विक स्तर पर बदलते आर्थिक और राजनीतिक हालात के बीच दोनों देशों की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगी।
विदेश मंत्रालय का बयान और कूटनीतिक संदेश
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह साझेदारी विश्वास, साझा मूल्यों और रणनीतिक सामंजस्य पर आधारित है। उन्होंने संकेत दिया कि यह शिखर वार्ता दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को नई दिशा देगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बैठक के बाद आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग पर एक अलग संयुक्त वक्तव्य जारी किया जा सकता है।
जापान के तीन दिवसीय दौरे पर बढ़ा सहयोग
जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची इस समय भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर कई महत्वपूर्ण बैठकें हो रही हैं।
भारत और जापान के बीच हाल के वर्षों में संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। वर्ष 2014 में दोनों देशों ने अपने रिश्तों को विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी का दर्जा दिया था, जिसके बाद से सहयोग के नए आयाम जुड़ते गए हैं।
भारत-जापान संबंधों का दीर्घकालिक विकास
दोनों देश वर्ष 2027 में अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे। इस अवधि में सुरक्षा, व्यापार, निवेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति और जनसंपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है।
वर्तमान में भारत और जापान के बीच 70 से अधिक संस्थागत संवाद तंत्र सक्रिय हैं, जो द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
भविष्य की साझेदारी की ओर बढ़ते कदम
विशेषज्ञों के अनुसार, इस शिखर वार्ता में लिए गए निर्णय आने वाले वर्षों में भारत-जापान संबंधों को नई ऊंचाई प्रदान करेंगे। आर्थिक सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में यह साझेदारी वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण मॉडल के रूप में उभर सकती है।

