वाशिंगटन, 02 जुलाई (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि कई दशकों बाद यह द्वीपीय देश अब अमेरिका की ओर बढ़ रहा है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किस बदलाव की ओर था और न ही क्यूबा के संबंध में किसी नई अमेरिकी नीति की घोषणा की। ट्रंप के इस बयान ने दोनों देशों के भविष्य के संबंधों को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
थियोडोर रूजवेल्ट लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह में दिया बयान
ट्रंप ने यह टिप्पणी बुधवार (स्थानीय समय) को नॉर्थ डकोटा के मेडोरा में आयोजित थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह के दौरान की। अपने संबोधन में वह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट की विदेश नीति, पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी प्रभाव और देश के ऐतिहासिक विस्तार पर चर्चा कर रहे थे।
इसी दौरान उन्होंने कहा, “क्यूबा की बात करें तो कई दशकों बाद अब वह हमारी ओर आ रहा है।” हालांकि उन्होंने इस बयान की कोई विस्तृत व्याख्या नहीं की और यह भी नहीं बताया कि अमेरिका और क्यूबा के संबंधों में किस प्रकार के बदलाव की संभावना है।

रूजवेल्ट की विदेश नीति का किया उल्लेख
अपने भाषण में ट्रंप ने थियोडोर रूजवेल्ट के कार्यकाल की विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने वैश्विक स्तर पर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत की थी। उन्होंने पनामा नहर के निर्माण और स्पेन-अमेरिका युद्ध के बाद अमेरिका के बढ़ते प्रभाव का भी उल्लेख किया।
ट्रंप ने कहा कि स्पेन-अमेरिका युद्ध के बाद स्पेन ने क्यूबा, गुआम, फिलीपींस और प्यूर्टो रिको पर अपना नियंत्रण छोड़ दिया था। इसी ऐतिहासिक संदर्भ के तुरंत बाद उन्होंने क्यूबा के अमेरिका की ओर आने संबंधी टिप्पणी की।
कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बोले
हालांकि समारोह का मुख्य उद्देश्य थियोडोर रूजवेल्ट की विरासत को सम्मान देना था, लेकिन ट्रंप ने अपने संबोधन में कई समकालीन विषयों को भी शामिल किया। उन्होंने पनामा नहर, ईरान, आव्रजन, अमेरिकी अर्थव्यवस्था और अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ जैसे मुद्दों पर भी अपने विचार रखे।
क्यूबा को लेकर ट्रंप का सख्त रुख
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से क्यूबा के प्रति सख्त अमेरिकी नीति के समर्थक रहे हैं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा शुरू की गई उस पहल को काफी हद तक पलट दिया था, जिसका उद्देश्य वाशिंगटन और हवाना के बीच सामान्य राजनयिक संबंध स्थापित करना था।
ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंधों को और कड़ा किया, अमेरिकी नागरिकों की यात्रा संबंधी नियमों को सख्त बनाया तथा कम्युनिस्ट शासन वाले इस देश के साथ वित्तीय लेन-देन पर अतिरिक्त पाबंदियां भी लागू की थीं।
दशकों से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं संबंध
साल 1959 की क्यूबा क्रांति के बाद से अमेरिका और क्यूबा के संबंध लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे। हालांकि वर्ष 2015 में पांच दशक से अधिक समय बाद दोनों देशों ने राजनयिक संबंध बहाल किए, लेकिन इसके बावजूद अलग-अलग अमेरिकी प्रशासन के दौरान रिश्तों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वर्तमान समय में भी आर्थिक प्रतिबंध, प्रवासन, क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक मतभेद अमेरिका-क्यूबा संबंधों के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। ट्रंप के ताजा बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों में किसी नए बदलाव की संभावना बन सकती है।


